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सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part11

आश्चर्य है, हमने जब प्रश्न किये थे तो विश्वास था कि पृथ्वीभर में कोई इनका उत्तर देने वाला नहीं परन्तु उन्होने क्षणभर में उत्तर दे दिये । उस दिन से हम इनसे अति प्रसन्न हैं । दो महापुरुषों द्वारा एक… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part10

क्रमित सलाह को मानने के लिए सदा उठत रहते थे, बंगाली भद्रपुरमा का कहना मानका ‘भाण ॥ ध्याऔर अपना स्वीकार किया गया टामीन ऑर्ग नाक स्वामी जय । ।तो बस पहनते से । हमने कारण पूछा है कि उब हम… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part9

वेदालोचन-रहित संस्कृत शिक्षा से लोग व्यभिचारी तथा हानिकारक हो जाते हैं। दिन मापी जी ।।जीवों में यह भी कहा था कि वेदालोचना-रहित संस्कृत शिक्षा से छ लाभ नहीं है, वह इसे लोग पुराणों केलोगों की कुछ आंखें खुलीं ।उपदेश से… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part8

कि मैं इस समय और लोगों के साथ बात कर रहे इसलिए में इनको इस उठ जाग ठौकरी ==सुनकर राज साहब स्वयं हो आ गये और कुछ समय पश्चात का उत्पत्ति पर स्वामी जी से प्रस किया।ने उतर दिया परन्तु… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part7

समस्त श्लोक उपनिषदों के हैं तो वह नाम उपाय नहीं। शो मा rगे । न.’ में समाविष्ट की है। फिर लोग वहां के गानों । ना ।।। महर्षि देवेन्द्रनाथ की खाड़ी में आत्म साधन पा वार्तालाप कला (Tutr FT गिरा… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part6

,या वसु ने माँ को मूर्तिपूजा का एक दूसरा रूप कहा था। दयानन्द जी ने उत्तर दिया कि ब्रह्म स्मरण करने केजिस कार्य का अनुष्ठान होता है और विशेष रूप से वह जो समस्त जगत् तथा साधारण जनता के सुख… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part5

म्याना ने कहा कि सांख्य निरीश्वर नही है जो जो लोग रियो बी टीका कर आर Vष्ट लागाकोरी नवे ऐसा समझते हैं. अन्यथा पदो के यो से साकार निरीश्वर पहीं जान पड़ते। हमने पूछाकि क य कसा? ते लगे कि… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part4

पहले बनारस के सर्वश्रेष्ठ पंडितों को एक सार्वजनिक शास्त्रार्थ में पराजित किया और अपने अन्य कार्यों से पूतोंबडी प्रसिद्धि पाई है कलकत्ता आया है और राजा ज्योतीन्द्र मोशन टैगोर के बाग के बंगले में निनयान नामक स्थान पर उ है।… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part3

राजा साहब हृदय से ईसाई मत की ओर झुके हुए थे। उनकी रानी की भी यही इच्छा थी कि स्वामी जी अवश्यपति मकान का समुचित प्रबंधन होने से स्वामी जी वहां न गये। भागलपुर में वर्णभेद के रहस्य पर वार्तालापसना… Continue Reading →

सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)part2

पश्चात् हमने उन्हें पांव धुलवा कर रसोई खिलवाई। फिर हम पिता जी को स्वामी जी के पास छोड़कर, वहा सेवेतदूर बरारी में, जहां हम पहले पढ़ते रहे हैं, अपने एक मित्र से मिलने गये । बरारी में हम पण्डित अभयराम… Continue Reading →

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