साधारण(sadharn), part5

जांघ स लंगड़ाता था । *इमलिये इससायेल के वंश उम जांघ की नस की जो चढ़ गड शी आ्रज लां नददं खाते क्योंकि उमने यथ्रकृूब के जांघ की नस का चढ़ गई थ...

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साधारण(sadharn), part4

(समाचक) वाह ईसाइयों के ईश्वर ! क्या बड़ा डॉक्टर है म्त्रयों की को्त म्ोनने की कान में शम्त्र वा औषध थे जिन में सवाली, ये सब बात अन्धाधुन्ध क...

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साधारण(sadharn), part3

२९-इसमपे्ल के देटों के नाम ये हैं:-इसमफल का पहिलोठा नवीत* और कीदार औरर आदबिएल और मिवसाम ्रोर मिममाश्र और दूम: और मस्सा । हदर और तेमा, इतर, न...

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साधारण(sadharn)part2

१६८ त्रयोदश समुल्लास ः बसने के काम की रहती है। इसलिये सब से बुरा गाड़ना हैं, उससे कुछु याढ़ा चा जउत में डातना , क्यांकि उसक जलजन्तु उसी समय ...

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साधारण(sadharn)

लड़के का, यह कैसा अद्भुत बात है ! यह ऐसा हुआ होगा किइंश्वर को भ्रम हआ होगा कि इड बात ही रोना है। ला यह ईश्वर और ईश्वर की पुस्तक की बात कभी ह...

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परमात्मा(prmatma), part5

ती यह वाइवल* का मत है वह केवल ईसाइयों का है सो नहीं किन्तु इससे यहूदी अभी गृहीत होते हैं जो यहां तेरहवें समुल्लास में ईसाई मत के विषय में लि...

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परमात्मा(prmatma)part4

कुरुक्षेत्र में चौरासी सहस नदी है । ( समीक्षा ) भला कुरुक्षेत्र बहुत छो उसको न देखकर एक मिथ्या बात लिखने में इनको लज्जा भी न आई। जासुसराउ ता...

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परमात्मा(prmatma)part3

दृश्यात भस्म रमाए होवें भी संख्यातकाल होता है, प्रवक्ता का नाम खण्टु के श्रसंख्यात खणड मन से कल्पे तब ११६ प्रगुल प्रमाण लोगों के कितने खएउ क...

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परमात्मा(prmatma)

किन्तु जो परमात्मा अनंत, सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, पवित्र, ज्ञानस्य है उस जैनी लोग जानते नहीं, कि जिसमें सर्वज्ञाती गुण यथातथ्य घटते हैं। गम्बनर ...

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परमात्मा(prmatma)part2

केवल कल्पनामात्र अविद्वानों को फंसाने के लिये समजाल है। रोहतास बर। शरीर कईले ॥ ( बा १ से सुः ३५१)। रि तिर दि सासरो। । बरस जोर छ र । बोललदिर।...

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गोलोक(golok), part5

देखिये । ज्योतिषी जी ने उत्तर दिया तो हुक्म, अन्नदाता, दशमी के दिन प्रातः काल बजे नाक कटवाने श्री नारायण के दर्शन करने का बड़ा अच्छा महत्त ह...

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गोलोक(golok), part4

तमज मूर्ति देखी फिर मट दीपक को आटा में कर दिया। वे मब नीचे गिर, नमस्कार । दूसरी ओर चले आये और उसी समय बीच में बातें कीं कि तुम्हारा धन्य माग...

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गोलोक(golok)part3

स्थान हैं उन पर मारते हैं और रसविक्रय ब्राह्मण के लिये निषिद्ध कर्म है उसको ३ करते हैं । (पूरा) गुसाईं जी रोटी, दाल, कढ़ी भात, शाक और मठरी त...

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गोलोक(golok)part2

घर पर जा चुपचाप काठ की पुतली के समान वेटा रहता हैं, न कुछ बोलता न लता विचारा वोले तो तब जो मूर्ख न होने मूर्खाणा बल मोनम' क्योंकि मुखों ...

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गोलोक(golok)

क्योंकि वह उनकी अर्धाङ्गी है। जैसे यहां स्त्री पुरुष की कामचेष्टा तुल्य अथवा 0 स्त्री की अधिक होती है तो गोलोक में क्यों नहीं ? जो ऐसा है तो...

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शास्त्र(saster), part5

प्रयोजन सिद्ध करने वाले ही का ग्रहण 'पोप'" शब्द से करना और त्राह्मण तथा साधु नाम ' से उत्तम पुरुषों का स्वीकार करना योग्य ह...

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शास्त्र(saster), part4

सेवा करनी योग्य है। रिपम्यास्या (पूर्व) तो हम कौन हैं ? (उत्तर०) तुम पोप हो। (पूर्व) पोष किसको कहत। १(उत्तर) इसकी सूचना रोमन भाषा में तो बड़...

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शास्त्र(saster), part3

ः क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों के विद्वान होने में तो कथा ही क्या कहनी ? जो परम्पका ओे वेदादि शास्त्रों का अर्थ सहित पढ़ने का प्रचार था वह भी ...

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शास्त्र(saster)part2

| सत्यार्थ प्रकाशः। २३६ कि मोक्ष मुलर साहब ने इधर उधर आर्यावर्त लोगों की की हुई टीका देखकर कुछ कुछ यथा तथा लिखा है, जैसा कि 'युञ्जन्ति ब...

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शास्त्र(saster)

करना चाहे तो उसी पर 'वरुणास्त्र' छोड़ दे अर्थात् जैसे शत्रु ने शत्रु की सेना पर आ शास्त्र छोड़ कर नष्ट करना चाहा वैसे ही अपनी सेना क...

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वैशेपिक(vasapic)part3

इस पूर्व वाक्य से । ( उत्तर० ) तुमने इस छान्दोग्य उपनिपद् का दर्शन भी नहीं किया। जब वह देखी होती तो वहां 'ब्रह्म' शब्द का पाठ ही नही...

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वैशेपिक(vasapic)part2

अति सूक्ष्म सूक्ष्मतर, अनन्त, पर्वत और गर्नयापन है । गरीब जीव भोर पर ईश्वर का व्याप्य व्यापक सम्बन्ध है। (पं) जिस जगह में एक नातु होती है उस...

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वैशेपिक(vasapic)

वैशेपिक में (प्राण) प्राण वायु को बाहर निकालना (अपान ) प्राण को बाहर से भीतर लेना (नितेश) आंख को बेचना (उन्मेष) आंख को बोलना (मन ) निश्चय स्...

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भूमिका(bumica), part6

की सेना को न न मोर निन्दा करी न करना । ये पर्त्रह* कर्म भर गुणा प्राहषणवर्णाण्य मनुष्य में अवश्य होने पाथि ॥२॥ थिय । ।। ५५५ ५। ५५५५५५५। ।। ।...

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भूमिका(bumica), part5

क्रम से अर्थात् ब्राह्मण वर्ण का ब्राह्मणी, क्षत्रिय वर्ण का क्षत्रिया, वैश्य वर्ण का वैश्या, शुद्र वर्ण का शुद्र के साथ विवाह होना चाहिये, ...

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भूमिका(bumica), part4

होते हैं वैसे तुम भी होते हो । तम मुखादि से उत्पन्न न होकर ब्राह्मणादि संज्ञा का अमि- मान करते हो इसलिये तुम्हारा कहा अर्थ व्यर्थ है और जो ह...

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भूमिका(bumica), part3

जानना चाहिये। क्योंकि वह उपस्थित नाम समीप प्राप्त हुए पदार्थ को छोड़के अनुपस्थित अर्थात प्राप्त पदार्थ की प्राप्ति के लिये श्रम करता है। इसल...

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भूमिका(bumica)part2

अर्थ सत्यार्थ प्रकाशः प्रथम समुल्लास । म मर्न । एलो पुरै २ ः ॥ दो से बने शो वषेत्र क्पय बति । तादेप कपव शा करिचाते चा परिच्ानि कूर्य दरिण्चा...

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भूमिका(bumica)

भूमिका लोग अपने ग्रन्यों को छिपा रखते हैं। और दूसरे मतस्य को न देते न सुनाते और न पढ़ाते.# इसलिये कि उनमें ऐसी ऐसी असंभव बातें भरी हैं जिनका...

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