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सायंकाल को भागलपुर(bhaglpur)

भागलपुर में ईसाइयों तथा ब्रह्म समाजियों के साथ धर्माचा (कार्तिक बदी, संवत १९२९, तदनुसार २०, अक्टूबर, सन् १८ २) *३० अक्तूबर सन् १८७२.रविवार, ६ बजे सायंकाल को भागलपुर पहुंचे। स्वामी जी आगे आगे जाते थेने पीछे थे। वहां जाकर सात… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part10

मनुष्यकृत प्रतीत होते ही पंचदशी बांचना बन्द कर दिया-इसी प्रकार कुछ समय व्यतीत होने पर लोग एकत्रितहोने लगे। उनमें से एक-दो वेदान्ती थे। उन्होंने इच्छा प्रकट की कि आप घंटे दो घंटे तक यदि कछ अपने मुखारविन्द सेकहा कर तो… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part9

आगरा में पहली शिष्य-मंडली: पं० सुन्दरलाल तथा बालमुकुन्द-मथुरा से आगरा पहुंचकर स्वामी जी यमनाके किनारे भैरव के मन्दिर के समीप ला गल्ला, पत्र रूपचन्द्र अग्रवाल के बगीचे में रहे । दस बारह दिन के पश्चातघासीराम लौट गया और नी-दस मास… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part8

टा सुविचार दा कि हमारे शिष्यों में से हमारे यमो यदि कुछरेगा तो दयानन्द हो करेगा। उन्होंने अत्यन्त प्रसन्नहोकर विद्यासमाप्ति की सफलता की गुरु दक्षिणा मांगी दयानन्द ने निवेदन किया कि जो आपको आज्ञा हो में उपस्थितहू।दब दंडी जी ने… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part7

उनको लाठी से मारा जिससे देडी जी वा हाथ दर्द करने लगा, तब दयानन्द जी ने कहा कि महाराज ! आप मुझे न माराकर क्योंकि मेरा शरीर वज्र के समान कठोर है, उस पर प्रहार करने से आपके कोमल हाथों… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part6

हमारे द्वारा अन्वेषित श्री स्वामी जी का जीवनवृत्त अध्याय १गंगातट पर सात वर्ष का जीवन (संवत् १९१७ से सं० १९२३ तक)मथुरा में स्वामी विरजानन्द जी से अध्ययन (संवत् १९१७ से चैत्र सं० १९२० तक)नर्मदा तट से मथुरा में स्वामी जी… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri), part5

या। पंडितों ने आक्षेप किया, यह क्रोध में आ गये और उसकी सिद्धि के लिए यह द्टा प्रन्ब बनाया और मिथ्या अभिमामें आकर इस अशुद्ध को शुद्ध कर दिखाया, परन्तु इस व्यर्थ प्रयत्न करने पर भी ‘पर’ शुद्ध हुआ शुद्ध… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri)part4

हुआ और सहस्रों रुद्राक्ष मालाएं मैंने अपने हाथ से दी । वहां शैवमत इतना पक्का हुआ कि हाथी, घोड़े आदि सबके गलेमें भी रुद्राक्ष की मालाएं पड़ गई।जयपुर से पुष्कर व अजमेर-जयपुर से मैं पुष्कर गया और वहां से अजमेर… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri)part3

| | ॥॥ ॥ ॥ १।५ ५५ ५ (एलिगे या ने तमके पजा के कार्ष में सम्मिलित होना पाप समझा।|| ।।।। ।। ।।)। ।। ।।। ।।।।।।। पॉलिश करने की अ अपने मनुष्यों को दी और उसने दो।।१।। । ।।।।।।।।।।।।। ५… Continue Reading →

दयानन्द सरसती का विवाह(dyanand sastri)part2

सुरक्षित है। चूंकि मेरे मन में इस बात की चिन्ता थी कि किसी प्रकार नर्मदा के उद्गम स्थान को देख इसलिये यह समझभय और आशंकाएं मझको मेरे इस निश्चय से नहीं रोक सकती थी। जब उन्होंने देखा कि उनकी आशंकायत… Continue Reading →

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